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Tuesday, May 21, 2019

देश में चल क्या रहा है?

सवाल सीधा है लेकिन जवाब घुमा-फिरा कर दिया जा सकता है। सवाल है आखिर देश में चल क्या रहा है ? टीवी पर एक विज्ञापन आता है जिसमें एक किरदार कहता है फॉग चल रहा है। वैसे यहां डिस्क्लेमर लगाना अच्छा रहेगा कि इस पोस्ट में किसी ब्रांड का प्रचार करने का कोई इरादा नहीं है। ब्रांड पर याद आया कि आजकल देश में मुद्दों को ब्रांड बना लिया गया है। राजनीति के कारोबार में सबने अपना अपना ब्रांड तैयार कर लिया है। मिसाल के तौर पर ब्रांड राष्ट्रवाद के मुकाबले ब्रांड न्याय मौजूद है। ब्रांड के नाम पर डर परोसा जा रहा है। आजकल डर का इस्तेमाल मुनाफाखोरी के लिए बखूबी किया जा रहा है। अब ये कौन कर रहा है इस पर अलग से रिसर्च पेपर लाने की जरूरत है। अहम बात ये है कि यदि मतदाता डरेगा तो फिर वो वोट कैसे देगा? फिर मतदाता को पोलिंग बूथ तक लाने की कवायद का क्या होगा? वैसे लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए कई सारी योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन हर बार यही आरोप लग जाता है कि इन योजनाओं के नीचे कभी जमीन नहीं है तो कभी आकाश नहीं है। आसमान में बादल हैं लेकिन धरती पर अनाज नहीं है। कोई भूख से मरा जा रहा है तो कोई प्यास से हलाकान है। सबके अपने-अपने दर्द हैं। सब कहीं-न-कहीं लाचारी की बीमारी से ग्रस्त हैं। देश की आबादी भले ही 130 करोड़ के आसपास है लेकिन सब अकेले हैं। किसी को सवाल पूछने में डर लगता है तो किसी को जवाब देने में । जो सत्ता पर बैठा है उसे अपनी गद्दी बचाने की चिंता सता रही है तो जो सत्ता में नहीं हैं उनमें सत्ता छीनने की होड़ मची है। ऐसे में जनसरोकार के मुद्दों की तस्वीर धुंधली पड़ती जा रही है। जाहिर है इसे देश के लिए बेहतर संकेत तो नहीं कहा जा सकता।   

Thursday, May 2, 2019

5 मई को नहीं होगा 'चेंज ऑफ गार्ड'


नई दिल्ली: प्रचंड गर्मी का असर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले चेंज ऑफ गार्ड समारोह पर पड़ा है। दरअसल 5 मई को होने वाले चेंज ऑफ गार्ड समारोह को अगले आदेश तक के लिए अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया है। ऐसा दिल्ली में भारी गर्मी को देखते हुए किया गया है। बता दें कि इस समारोह को देखने के लिए बड़ी संख्या में आम नागरिक भी आते हैं। ऐसे में गर्मी के चलते होने वाली परेशानियों को ध्यान में रख कर ये फैसला लिया गया है। चेंज ऑफ गार्ड के बाकी शेडयूल में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  15 नवंबर 2019 से 14 मार्च 2020 के दौरान हर शनिवार को चेंज ऑफ गार्ड सुबह 10 बजे से लेकर 10.45 बजे तक आयोजित होगा वहीं 15 मार्च 2020 से लेकर 14 नवंबर 2020 तक हर शनिवार को सुबह 8 बजे से लेकर 10.40 बजे तक ये कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। PIB

Friday, June 15, 2018

आंखों से नींद गायब है मेरी

परेशान हूं इस कदर।
कि रातभर नींद नहीं आई।
बड़ा अजीब मसला है।
मुद्दों की खाई में गिरकर
मेरी नींद हराम हो गई।
कैसे समझाऊं ...
मेरी आंखों में कितना दर्द है?
बस एक थाली ही तो खाई थी
लेकिन ये तो सेहत से खिलवाड़ हो गई।
कब बंद होगा खिलाने-पिलाने का धंधा?
क्या मां के हाथों में ममता नहीं है?
क्या दादी के स्नेह में कमी है?
फिर क्यों स्कूल बन गया है भोजनालय?
ऐसी कई घटनाओं ने झकझोरा हैं।
मिड डे मील खाकर बच्चे बीमार हुए।
इसे नहीं रोका तो देर हो जाएगी
स्कूल के कमरे में भविष्य बर्बाद हो जाएगी।
मगर इसका इल्म किसी को नहीं है।
सरकार सोई है और मैं जगा हूं।
समझ में नहीं आता ये कौन सा मर्ज है?
जो मेरी आंखों से नींद गायब है।



Sunday, March 18, 2018

जरा तस्वीर बदलने दो

अब तन्हा रहने दो ।
बस यही गुजारिश है।।

थोड़ी जिंदगी को समझ लूं।
बस यही ख्वाहिश है।।

बेबसी, लाचारी देखी बहुत।
अब जरा मुस्कुराने की मोहलत दो।।

जख्मों को करवट बदलने दो।
जरा तस्वीर बदलने दो।।

रिश्तों से जब दर्द रिसने लगे।
तो आंखों से आंसू बहने दो।।

मैं नाउम्मीद के कफन में न दफन होऊंगा।
मुझमें मौत से लड़ने की हिम्मत रहने दो।। 

Tuesday, March 13, 2018

जिंदा हूं बेखबर ही सही

उसने प्यार से बुलाया।
मगर मैं गया नहीं।।

मैं क्यों नहीं गया।
किसी ने पूछा ही नहीं।।

दिमाग को खूब फिराया।
मगर कुछ निकला नहीं।।

दिल को खूब टटोला
धड़कन के सिवा कुछ मिला नहीं।।

पीछे मुड़कर भी देखा
कोई हमसफर दिखा ही नहीं।।

Sunday, March 11, 2018

अतीत को खाक होने न दिया

कल तक उम्मीदों पर जिंदा था।
आज हकीकत से निराश हूं।।

नफरत तलाशती रही उम्र भर।
मैं तो मोहब्बत की प्यास हूं।।

तुम ठुकरा दो मुझे गम नहीं।
जानता हूं जीकर भी मर सकता हूं।।

वजह बहुत हैं रुख्सत होने की।
मैं हर दिन मौत को पास देखता हूं।।

संघर्ष की भट्ठी में तपी है जिंदगी।
फिर भी मेरा वजूद राख न हुआ।।

मुझे भी दरकार है नई पहचान की।
तुमने अतीत को खाक न होने दिया।


Monday, March 5, 2018

वह जंगल है चंपारण

नित्य होता है अपहरण ।
नारी का होता चीरहरण ।
भाई-भाई में होता रण ।
वह जंगल है चंपारण ।।

निर्धन का होता शोषण।
होता निशाचर का पोषण ।
न्याय का नहीं है स्मरण ।
वह जंगल है चंपारण ।।

भूख से जहां होता मरण ।
कहां पर ले जनता शरण ।
जहां पड़ चुके हैं हिंसा के चरण ।
वह जंगल है चंपारण ।।

                            (30 अगस्त 1997 को नरम गरम पाक्षिक पत्र में प्रकाशित)

Saturday, March 3, 2018

आजतक की गलती नंबर वन

दूर-दूर तक नहीं कोई, नंबर वन सिर्फ आजतक। सर्वश्रेष्ठ न्यूज चैनल का दंभ भरने वाले आजतक का हाल ये
है कि इसके कर्मचारियों को गिनती भी नहीं आती। त्रिपुरा विधानसभा के रुझान दिखाने के चक्कर में आजतक ने 59 सीटों में से लेफ्ट को 40 सीटें दे दी वहीं बीजेपी को 19 सीटें थमा दी। जबकि हकीकत ये है कि त्रिपुरा में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिल रहा हे। यहां बीजेपी को 40 सीटें मिल रही हैं वहीं लेफ्ट को 19 सीटों पर ही संतोष करना पड़ रहा है। ये पहली बार है कि यहां लाल की जगह भगवा लहर देखने को मिल रही है। त्रिपुरा और नागालैंड में भगवा सरकार बनने जा रही है। वहीं मेघालय में कांग्रेस सरकार बनाने की कोशिश में जुट गई है। यहां पर कांग्रेस को 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं एनसीपी को भी 19 सीटें मिलती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि मेघालय में पंजा अपनी पकड़ और मजबूत बनाने की कवायद में जुट गया है। इसका जिम्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को सौंपी गई  है। राजनीति की बात अब यही खत्म करते हैं और मीडिया की बात करते हैं। मीडिया जल्दबाजी के चक्कर में ऐसी गलतियां कर जाता है कि दर्शकों को सोचना पड़ता है कि वो किस पर विश्वास करे सबसे तेज आजतक पर या फिर चैनल जो कहता है 'आपको रखे आगे' । इस आगे और पीछे के चक्कर में बड़े-बड़े चैनल ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो जाता है। सबसे तेज के चक्कर में आज तक का हाल क्या है। ये आप तस्वीर को देखकर समझ सकते हैं। 

Monday, February 26, 2018

कितने खूबसूरत थे वो 'लम्हे'

मैं तो बेखबर था
कि तू इतनी जल्दी रुख्सत हो जाएगी।

क्या पता था ?
तेरे जाने से मेरी जान चली जाएगी!

मैं रो रहा हूं तेरी जुदाई पर
अब तू मेरे आंसू भी पोछने नहीं आएगी। 

तेरे सोलवें श्रृंगार पर नाज था मुझे
अब तो तेरी परछाई भी नजर नहीं आएगी।

खुदा गवाह है
अब नजर नहीं आएंगी तेरी निगाहें।

मौत भी बड़ी चालबाज निकली 
क्या पता था गुम हो जाएगी चांदनी?

मोहब्बत की फकीरी में घूमता रहा ताउम्र
अब किस्मत की लकीर भी काम नहीं आएगी।  

तू रूप की रानी है...
अब किसी के हाथ नहीं आएगी। 

दिल में दर्द बहुत है मगर...
दुआ है तेरी रूह जन्नत में जाएगी।