Wednesday, December 11, 2019

राज्यपाल का हवाई सफर


पंजाब के राज्यपाल विजेंद्र पाल सिंह बदनौर ने हलवारा एयरफोर्स स्टेशन का दौरा किया। इस मौके पर विजेंद्र पाल ने SU-30 MKI विमान पर सफर भी किया। इस विमान के पायलट कमांडिंग अफसर जी पी कैप्टन एन के वत्स्या थे। राज्यपाल ने सफर के दौरान विमान की खासियतों को जाना। उन्होंने विमान की क्षमता पर संतोष जताया और वहां मौजूद जवानों के कामों की तारीफ भी की।  

Saturday, December 7, 2019

लोकतंत्र एवं मीडिया: एक विमर्श


मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका की तरह मीडिया भी लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोकतंत्र की खासियत है कि ये जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा संचालित होता है। मीडिया समाज का आईना है। समाज में जो घटता है मीडिया उसे ही दिखाता और प्रकाशित करता है। देश के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में जो कुछ भी घटता है, मीडिया उसे जन-जन तक पहुंचाता है। जिससे जनता के बीच लोकमत का निर्माण होता है। जिसके आधार पर निर्णय कर जनता चुनावों में अपना जनादेश देती है। यदि जनता जागरूक नहीं होगी तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी। आजादी के बाद देश में समाचार पत्र, पत्रिकाएं, टेलीविजन, रेडियो और फिल्मों सहित न्यू मीडिया का तेजी से विकास हुआ है। जनसंचार के ये सभी माध्यम जनता की बात शासन तक और शासन की बात जनता तक पहुंचाने का कार्य  करते हैं। मीडिया घटनाओं, समस्याओं और विचारों के संबंध में जनता को सूचना देते हैं और उऩ्हें शिक्षित करते हैं। इस तरह जनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा अपनी भागीदारी करती है। देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद प्रेस ने सरकारी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाया।  जिसके चलते सरकार को लोक कल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने में आसानी हुई और उसका लाभ जनता को मिला। मीडिया जनसरोकार के मुद्दे उठाता है जिससे जनता के हितों का संरक्षण होता है। चाहे सामाजिक न्याय की बात हो या फिर पर्यावरण संरक्षण की, हर मुद्दे पर मीडिया ने जनता को जागरूक  करने की कोशिश की है। मीडिया ने अपनी खबरों में दलितों आदिवासियों के साथ अत्याचार को प्रमुखता दी है। जिसके बाद सरकार का ध्यान इन वर्गों के उत्थान पर गया है। मीडिया ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है। मीडिया ने सामाजिक-आर्थिक समस्याओं की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। सूचना और विचारों के प्रचार प्रसार के लिए समाचार पत्रों के साथ साथ रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया का महत्व बढ़ गया है। रेडियो का विशेष महत्व यह है कि निरक्षर व्यक्ति भी बिना किसी मदद के सूचनाएं हासिल कर सकता है। गांवों में रहने वाले अधिकतर लोग रेडियो पर निर्भर हैं। रेडियो और टेलीविजन पल-पल का समाचार लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। लोग टीवी पर घटनाओं को घटते हुए लाइव देख सकते हैं। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वो जन-जन को सूचना दें, शिक्षित करें और उसका मनोरंजन करें। इसको लेकर मीडिया के सामने कई चुनौतियां भी हैं। लोकतंत्र में समाचार माध्यमों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। उनके द्वारा प्रकाशित या प्रसारित और उस पर की गई टीका-टिप्पणियों पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जाती। अतः मीडिया से अपेक्षा की जाती है कि वो आचार संहिता का पालन करें। उन्हें किसी प्रकार की अफवाह की तह तक जाना चाहिए, जिससे सत्य को प्रकाश में लाया जा सके। भारत जैसे देश में अफवाहों की वजह से कई बार सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं। तोड़फोड़ कर सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जाता है। सनसनीखेज समाचारों से समाचार पत्र की बिक्री बढ़ सकती है, न्यूज चैनल की टीआरपी बढ़ सकती है लेकिन इसका कोई दूरगामी फायदा नहीं होता। कई मामलों में मीडिया को संयम से काम लेना चाहिए। मीडिया द्वारा दिए गए समाचार के आधार पर गुस्साई भीड़ निर्दोष व्यक्ति की हत्या तक कर देती है जिससे अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती  है। लिहाजा मीडिया के सामने आत्म अनुशासन की जरूरत है।

Thursday, November 21, 2019

कितने जागरूक हैं हम ?

 जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं! आखिर कब रुकेगा
सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल?