सब गोलमाल है...

BCLL और भोपाल नगर निगम के संयुक्त प्रयास से सिटी बस की सेवा अच्छी पहल है। लेकिन ऐसा लगता है कि निगम प्रशासन का सिटी बस के बेहतर संचालन को लेकर कोई अच्छी कोशिश नहीं है। प्राइवेट बस संचालक की बात ही अलग है। उनके लिए नियम कानून नाम की चीज ही नहीं है। बात सरकारी लाल बसों की हो रही है। सरकारी लाल बसों की स्थिति काफी चिंता का विषय है। भोपाल में प्रदूषण फैलाने में इन सरकारी बसों की अहम भूमिका है। बसों से निकलता काला और जहरीला धुआं इंसान के फेफड़ों में जाकर मौत को बुलावा भेज रहा है। ये पता ही नहीं चलता कि बस की निगरानी होती भी है या नहीं।  26 जुलाई की घटना से साफ हो गया कि इन बसों से सिर्फ प्रदूषण ही नहीं हो रहा, बल्कि भ्रष्टाचार भी जमकर हो रहा है। उदाहरण के तौर पर कंडक्टर ने किराये के पैसे तो ले लिए, लेकिन उसने उसका टिकट नहीं दिया। जाहिर है कि वो पैसा उस कंडक्टर की जेब में गया होगा। यानि कंडक्टर ने सरकार को चूना लगा दिया। 

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