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Friday, December 8, 2017

डिजिटल इंडिया का एक सच ये भी...

बेतिया (पश्चिम चंपारण) केंद्र की मोदी सरकार भारत में डिजिटल इंडिया के सपने देख रही है। ज्यादा से
ज्यादा डिजिटल तरीके से लेन-देन किया जाए, इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी गंभीर दिखते हैं। नोटबंदी को भी डिजिटलीकरण की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। नोटबंदी से जनता को कितनी परेशानी हुई, इसका अहसास तो नरेंद्र मोदी जी को नहीं हुआ होगा, क्योंकि वो जहां उठते -बैठते हैं। वहां डिजिटल वातावरण है। लेकिन उससे बाहर निकले तो भारत में कई शहर और गांव-कस्बे हैं जहां डिजिटल का मतलब भी लोगों को नहीं मालूम। उदाहरण के तौर पर बिहार के बेतिया शहर में सरकारी उपक्रम लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की बात करें तो यहां प्रीमियम जमा करने के लिए स्वाइप मशीन नहीं है। जिसके चलते लोगों को नकदी जमा करना पड़ रहा है। नकदी के चक्कर में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन LIC है कि मानता नहीं। उसके पास डिटिजल इंडिया को साकार करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई दे रही है।  ऑफिस में एसी है लेकिन डिजिटल लेन-देन की सुविधा नहीं है। मोदी सरकार डिजिटल इंडिया का गुणगान गाती रहेगी, लेकिन लोग सुविधाओं के अभाव में परेशान हो रहे हैं और इसका असर न तो LIC पर पड़ रहा है और न ही सरकारी नुमाइंदों पर । चिंता इस बात की है कि आधार कार्ड और पैन कार्ड नंबर सभी पॉलिसियों से लिंक कराना है। उसके लिए 31 दिसंबर तक की मियाद तय की गई है। अब कौन कितनी जल्दी अपनी पॉलिसी को आधार और पैन कार्ड से लिंक कराकर फुर्सत पा लेता है। ये देखना तो दिलचस्प होगा। मगर उन गरीबों और अशिक्षित लोगों का  क्या होगा जो इस फरमान के बारे में अऩजान हैं। 

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