लखनऊ में रेल मंत्री पीयूष गोयल का विरोध, रेलवे यूनियन के कार्यक्रम में गए थे, उनके भाषण के बाद हंगामा, कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर पीयूष गोयल को जाना पड़ा
आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बिना इजाजत प्रदेश में सीबीआई अधिकारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। सबरीमाला विवाद: प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक कार्यकर्ता तृप्टि दे्साई को कोच्चि हवाई अड्डे से बाहर नहीं निकलने दिया। तृप्टि देसाई सबरीमाला मंदिर जाने वाली थीं। पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व उपप्रबंधक पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज। चक्रवाती तूफान गाजा पहुंचा तमिलनाडु, 11 की मौत। भारत की मुक्केबाजी विश्व कप मेजबानी खतरे में।
भारत के संविधान के निर्माण में 2 साल 11 महीना और 18 दिन का समय लगा था। शुरू में 395 अनुच्छेद 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 389 थी जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांत 93 देसी रियासत और 4 कमिश्नर क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे। संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ जिसकी अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुन लिया गया।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक।

50% की छूट का भरोसा !

Flat 50% की छूट। जी हां आधी कीमत पर आपको इस स्टोर में कोई भी सामान मिल जाएगा। ये रिलायंस का
ट्रेंड्स शोरूम है। जहां पचास प्रतिशत की छूट देने का बोर्ड लगाया गया है। रिलायंस अपने आपमें एक ब्रांड है। रिलायंस यानि भरोसा। धीरूभाई अंबानी ने जब रिलायंस की नींव रखी होगी तो उन्होंने भी इस भरोसे के साथ कंपनी की शुरूआत की होगी कि ये कंपनी आगे चलकर देश की बड़ी कंपनी बन जाएगी। कंपनी की क्या स्थिति है वो आपके सामने हैं। धीरूभाई अंबानी के दोनों बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी ने रिलायंस को और ऊंचाई देने की कोशिश की। लेकिन इस कंपनी के साथ एक सच ये भी है कि इसके शोरूम में मार्केटिंग का खेल खूब खेला जाता है। यानि गंजे को कंघी बेचने में इस कंपनी के कर्मचारी काफी माहिर हैं। अब इस शोरूम को ही देख लीजिए। 50% की छूट का बोर्ड लगाकर ग्राहकों को भरमाया जा रहा है कि वाकई रिलायंस में सस्ते दामों पर सामान मिल रहा है। लेकिन जरा सोचिए जो लोग गंजे व्यक्ति को कंघी बेच सकते हैं, क्या वो आपको पुराना प्रोडक्ट नहीं बेच सकते हैं? ये पचास प्रतिशत की सीधी छूट का मतलब निकाला जाए तो यही होगा कि या तो कंपनी का प्रोडक्ट बिक नहीं रहा है तो पचास प्रतिशत की छूट देकर बेचने की कोशिश की जा रही है या फिर प्रोडक्ट के मूल दाम में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर प्रोडक्ट का दाम बताया जा रहा है। यानि इस बढ़े हुए दाम में 50 प्रतिशत की छूट दे दी जाए तो कंपनी को फायदा होगा। छूट के बाद भी उसका प्रोडक्ट अपने मूल प्राइस में बिक जाएगा। यहां ग्राहक समझेगा कि उससे सस्ते में ब्रांडेड सामान मिल गया। यहां गौर करने वाली बात है कि दीपावली और क्रिसमस के दौरान कंपनियां टारगेट लेकर चलती हैं कि उनको बाजार में इतना सामान सेल करना है। जो सामान इन त्योहारों के दौरान नहीं बिकते, उनको बेचने के लिए कूपन रीडीम और छूट की तरकीब अपनाई जाती है। 

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