जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग, गठबंधन सरकार बनाने की संभावना खत्म, भाजपा ने जल्द चुनाव कराने की मांग की
सबरीमाला केस: केरल हाईकोर्ट ने के सुरेंद्रन के अलावा 71 लोगों को दी जमानत। तमिलनाडु: कांग्रेंस सांसद एम आई शानावास का निधन। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 60 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग। सीबीई रिश्वतकांड: डायरेक्टर आलोक वर्मा का जवाब लीक होने पर सुनवाई स्थगित। 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी- सुषमा स्वराज। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लाल मिर्च पाउडर से हमला। राज्यसभा की बैठक 11 दिसंबर 2018 से 8 जनवरी 2019 तक। राहुल गांधी ने अजित डोभाल के बहाने पीेएम मोदी पर निशाना साधा। कर्नाटक में किसानों के नाम वारंट निकले- पीएम मोदी । मुद्रा योजना से 14 करोड़ लोगों को मिला कर्ज- पीएम मोदी। महाराष्ट्र के वर्धा सैन्य डिपो में धमाका, 6 की मौत। भारत-भूटान ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। महिला मुक्केबाजी: मैरीकॉम सेमीफाइनल में पहुंचीं।
भारत के संविधान के निर्माण में 2 साल 11 महीना और 18 दिन का समय लगा था। शुरू में 395 अनुच्छेद 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 389 थी जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांत 93 देसी रियासत और 4 कमिश्नर क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे। संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ जिसकी अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुन लिया गया।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, त्रिपुरा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय, झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू।

ठंड से कैसे बचेगी जान ?

उफ ये सर्दी। चारों तरफ कोहरा ही कोहरा। सबकुछ धुंधला धुंधला सा। पारा 6 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर
गया। इंसान तो इंसान इस सर्दी से जानवर भी परेशान हैं। सर्दी से बचने के लिए इंसानों ने तो कुछ इंतजाम भी कर लिए हैं, लेकिन जानवरों का तो बुरा हाल है। ठंड से वो सिकुड़ रहे हैं। ठंड की सिहरन से लोग घरों से बाहर निकल नहीं पा रहे हैं। वहीं ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने कोई इंतजाम भी नहीं किया है। एक समय था जब चौक-चौराहों पर प्रशासन अलाव का इंतजाम करता था। लेकिन लगता है कि इस बार प्रशासन अलाव जलाना भूल गया। प्रशासन तो स्कूलों को भी बंद करवाना भूल गया। नतीजा ये है कि बच्चे कड़कड़ाती ठंड में कांपते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं। मगर शिक्षा विभाग बेखबर होकर खुद ठंड से बचने की कोशिश में है। कोहरे के बीच बस और ट्रक जोखिम उठाकर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। कई बाइक सवार भी कोहरे के बीच खतरा उठाते नजर आ रहे हैं। सबकुछ भाग्य-दुर्भाग्य के ऊपर छोड़़ दिया गया है। अब तक ठंड ने कई लोगों की जान ले ली है। घटना और दुर्घटना के भी यात्री यात्रा करने पर मजबूर हैं। गनीमत है कि बिहार में सड़कों की स्थिति थोड़ी सुधरी है वरना दुर्घटनाओं का गणित कुछ और ही होता। इस ठंड ने प्रशासनिक अमले की तैयारी की पोल खोल दी है। शायद ये कहना गलत नहीं होगा कि शासन-प्रशासन भी ठंड के आगे बेबस है।    

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छायावादी कवि: जयशंकर प्रसाद (1890-1937)- कामायनी, आंसू, लहर, झरना, चित्राधार, उर्वशी, वनमिलन, प्रेम राज्य, करुणालय, कुसुम, अयोध्या का उद्धार।