जम्मू-कश्मीर: सांबा सेक्टर में विस्फोट, BSF के तीन जवान घायल
NDA के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की 22 नवंबर को होने वाली बैठक स्थगित। जेट एयरवेज के लिए कोई बेल-आउट पैकेज नहीं- सुरेश प्रभु। झारखंड के 18 जिले सूखाग्रस्त घोषित। बेंग्लुरु में 5 हजार किसानों ने प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट में SIT ने जकिया की याचिका का विरोध किया, जकिया ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें 2002 के दंगे में मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दी गई है। NIA ने अमृतसर निरंकारी डेरे पर हमले की जगह का निरीक्षण किया। कानपुर के IIT के चार प्रोफेसर के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज। अल्जीरिया की फुटबॉल टीम ने टोगो को 4-1 से पराजित कर अगले साल कैमरून में होने वाले अफ्रीकन कप ऑफ नेशंस के लिए क्वालीफाई कर लिया है। विश्व मुक्केबाजी महासंघ ने विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में खराब व्यवहार के चलते बुल्गारिया के कोच पेटार योसिफोव की मान्यता रद्द कर दी है।
भारत के संविधान के निर्माण में 2 साल 11 महीना और 18 दिन का समय लगा था। शुरू में 395 अनुच्छेद 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 389 थी जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांत 93 देसी रियासत और 4 कमिश्नर क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे। संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ जिसकी अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुन लिया गया।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, त्रिपुरा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय, झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू।

सरकारी दर्जे के लापरवाह से पड़ा पाला !

कैसे और किस तरह बताऊं, बात समझ में नहीं आ रही।आएगी भी कैसे ? सरकारी मुलाजिम से जो पाला पड़ा
है। लालफीताशाही में योजनाओं की गर्दन कसते देखा है। अधिकारी-कर्मचारी की लेटलटीफी भी देखी है। सरकारी महकमे में क्या-क्या खिचड़ी पकती है,  इसकी भनक तक किसी को नहीं लगती है। आखिर इस प्रशासनिक अमले को इस बात का दंभ है कि वही सरकार चला रहे हैं। उनके बिना सरकार पंगु है। खैर सरकारी मानसिकता जो भी हो वो सरकार की टेंशन है। फिलहाल हमारी टेंशन ये है कि हम जब किसी सरकारी दफ्तर में अपने आवेदन के साथ पहुंचते हैं तो फिर क्या-क्या होता है, हमें किस-किस  हालात से गुजरना पड़ता है। उसको बयां करने बैठे तो बातों का सिलसिला खत्म नहीं होगा। सो बात शॉर्टकट में कही जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। SBI में खाता खुलवाना था। बेचारे इतने सीधे-साधे कर्मचारी थे कि उऩ्होंने पटना तक की दौड़ लगवा दी। ऐसा लगा खाता ना हुआ बैंक वालों ने कुबेर का खजाना देने के लिए पटना बुलाया था। खैर हमने भी दौड़ लगाई, लेकिन पटना के दफ्तर में पहुंचते ही हमारी सारी ऊर्जा और उम्मीद खत्म हो गई। हम ठहरे साधारण आदमी, सो न कोई आवभगत हुई और न ही सेवा सत्कार। जिस काम के लिए भेजा या बुलाया गया था। उस पर साहब लोगों का तेवर ऐसा था कि हमको लगा कि हमने कोई क्राइम कर दिया है। क्या इस देश में RTI लगाना गुनाह है? गुनाह है तो फिर हम दोषी है और यदि ये कानून है तो हम इसका इस्तेमाल करेंगे। ये आम आदमी का हथियार है जिसके जरिए वो सरकारी दर्जे के लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को आगाह करता है कि दफ्तर में काम करने के मामले में लापरवाही अब नहीं चलेगी, संभल जाओ। अब पब्लिक जागरूक होने लगी है। अब तुम्हारे दफ्तर के वो सौ बार  चक्कर लगाने वा्ली नहीं है। अब सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 का असर ये है कि अब लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी को चक्कर लगाना पड़ सकता है। 

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छायावादी कवि: जयशंकर प्रसाद (1890-1937)- कामायनी, आंसू, लहर, झरना, चित्राधार, उर्वशी, वनमिलन, प्रेम राज्य, करुणालय, कुसुम, अयोध्या का उद्धार।