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6 देशों के राजदूत भारत में नियुक्त

(नई दिल्ली) राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 6 देशों के राजनयिकों ने अपने लेटर ऑफ क्रिडेंस
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपे। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने उनके लेटर ऑफ क्रिडेंस को स्वीकार करते हुए उन्हें भारत में राजनयिक दूत के तौर पर नियुक्ति को अपनी स्वीकृति दे दी। जिन 6 देशों के राजनयिकों को भारत में रहने की अनुमति दी गई है उसमें स्लोवाक गणराज्य, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, उरूग्वे, फिजी और केन्या के राजदूत और उच्चायुक्त शामिल हैं।  राष्ट्रपति की तरफ से जिन राजदूतों ने अपने लेटर ऑफ क्रिडेंस प्राप्त किए वो हैं स्लोवाक गणराज्य के राजदूत इवान लंकरिकम, अल साल्वाडोर गणराज्य के राजदूत एरियल एंड्रैड गैलिंडो, इक्वाडोर गणराज्य के राजदूत हेक्टर क्यूवा जैकोम, उरुग्वे के राजदूत अल्वारो ए मालमियेर्का, फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त योगेश पुंज और केन्या के उच्चायुक्त विली किपोकोर बीट शामिल हैं। बता दें कि राजदूतों की नियुक्ति की प्रथा काफी पुरानी है। रामायण और महाभारत काल से ये प्रथा चली आ रही है। प्राचीन काल से ही रोम, चीन, यूनान और भारत एक-दूसरे के यहां अपने राजदूत नियुक्त करते थे। एक-दूसरे के यहां स्थायी रूप से राजदूत नियुक्त करने की प्रथा सबसे पहले इटली और फ्रांस ने शुरू किया।  1815 में वियना की कांग्रेस ने राजदूतों की तीन श्रेणियां बनाई। बाद में  1818 में एक्स-ला-शैपल की कांग्रेस ने राजदूतों की चौथी श्रेणी बनाई। हालांकि औपचारिकता और शिष्टाचार के अलावा इस वर्गीकरण का अब कोई महत्व नहीं है। 

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