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बीजेपी-जदयू में सीट बंटवारे पर बन सकती है सहमति !

(पटना) भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज सुबह 10 बजे पटना पहुंच गए। उनके स्वागत के लिए
एयरपोर्ट पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय, बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, सह प्रभारी पवन शर्मा, सी आर पाटिल, भाजपा की और से सरकार में मंत्री बने सभी नेताओं समेत कई लोग मौजूद थे। पटना पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। एयरपोर्ट से अमित शाह सरकारी गेस्ट हाउस रवाना हुए जहां उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जलपान किया। बता दें कि अमित शाह और नीतीश कुमार की बैठक में सीटों के बंटवारे पर बात हो सकती है। इस बैठक में बड़े भाई और छोटे भाई के फॉर्मूले को अपना जा सकता है। अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच जलपान से कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों पार्टियों के बीच खटास खत्म हो गई है। अमित शाह रात में मुख्यमंत्री आवास पर रात्रि भोजन भी करेंगे। ऐसे में नीतीश कुमार की भाजपा के प्रति जो नफरत थी, अब वो दोस्ती में बदल गई है। यदि सीटों के बंटवारे को लेकर पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला अपनाया जाता है तो जाहिर सी बात है इसका सबसे ज्यादा फायदा नीतीश कुमार को होगा। नीतीश भी इस बात को भली-भांति जानते हैं। यही वजह है कि उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। इससे पहले के विधानसभा चुनाव में वो राजद के साथ महागठबंधन करके देख चुके हैं। उस चुनाव में महागठबंधन से सबसे ज्यादा फायदा लालू यादव की राजद को हुआ था। 2015 में हुए इस विधानसभा चुनाव में राजद को 81 सीटें मिली थीं, जबकि जदयू को 70 सीटें हासिल हुई थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उस वक्त ये उम्मीद थी कि जनता उनके विकासकार्यों के आधार पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देगी, लेकिन हालात बदल गए और जातिगत समीकरण चुनाव में हावी हो गए। लिहाजा इससे सबक सीखते हुए नीतीश कुमार ने अचानक पाला बदला और राजद को छोड़ भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया और 27 जुलाई 2017 को फिर से सरकार बना ली। इस सरकार में भाजपा की ओर से सुशील कुमार मोदी को
उपमुख्यमंत्री बनाया गया। 243 सीटों वाली विधानसभा में इस समय NDA के 131 सीटें हैं। जाहिर है नीतीश सरकार पूर्ण बहुमत में है। इसी तरह लोकसभा के 2014 के चुनाव में 543 सीटों में NDA को 336 सीटें मिली थी। जबकि UPA को 60 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इसमें सबसे बुरी स्थिति कांग्रेस की निकली। कांग्रेस महज 44 सीटों पर सिमट गई। जबकि 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी-जदयू के गठबंधन को 32 सीटें मिलीं। इस चुनाव में बीजेपी को 12 और जदयू को 20 सीटें मिलीं। इसी तरह 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में भाजपा-जदयू गठबंधन को 206 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में जदयू ने 115 और भाजपा ने 91 सीटों पर विजय हासिल की थी। लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश ने भाजपा को छोड़ राजद से हाथ मिलाया, जिसका नुकसान उनको झेलना पड़ा। अब जब अमित शाह बिहार में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने में लगे हैं तो ये देखना दिलचस्प होगा कि उनकी इस रणनीति में जदयू उनका कितना साथ देती है ? 

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