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'तीर' चलाने आ रहे हैं अमित शाह

(पटना) लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हर राज्य
में घूम-घूमकर पार्टी की स्थिति को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमित शाह 12 जुलाई को बिहार दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे का मकसद दतित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग को भाजपा के पक्ष में करना है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अमित शाह का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण हैंं। क्योंकि इसमें तय होगा भाजपा और जदयू गठबंधन का भविष्य। हालांकि जदयू की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आ रहा है जिससे ये लगे कि दोनों पार्टियों के बीच किसी प्रकार की टकराहट है। वैसे ये भी सच है कि नीतीश के नेतृत्व वाली जदयू बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी या फिर दोनों के बीच सीटों का बंटवारा बराबर बराबर का होगा। बता दें कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। यदि पिछले फॉर्मूले को याद किया जाए जिसमें जदयू-बीजेपी गठबंधन ने राजद हाशिये पर भेज दिया था। ऐसे में ये माना जा रहा  है कि लोकसभा की 20-20 सीटों पर दोनों पार्टियां चुनाव लड़ सकती हैं। माना ये भी जा रहा है कि अमित शाह अपनी चुनावी रणनीति तय करने के साथ नीतीश कुमार से मिलेंगे और आगामी चुनावी तैयारियों पर चर्चा होगी। फिलहाल अमित शाह अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी मंत्र देने आ रहे हैं। उनका जोर राजद के माय समीकरण को तोड़ना भी होगा। बता दें कि प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय हैं जो यादव जाति से आते हैं। अमित शाह को उम्मीद है कि वो यादव बहुल इलाकों में अच्छी बैठ बना सकते हैं। अमित शाह बूथ लेवल पर अपने कार्यकर्ताओं को तैनात करने की रणनीति पर जोर देंगे। बहरहाल पटना में 12 जुलाई को अमित शाह के स्वागत के लिए चारों तरफ बीजेपी का झंडा लहराने लगा है। स्वागत के लिए कई तोरण द्वार बनाए जा चुके हैं। अब देने वाली बात ये होगी कि आगामी चुनाव में अमित शाह सटीक निशाने पर तीर चला पाते हैं या नहीं, यहां याद रखने की बात ये है कि बिहार में चुनावी तीर चलाने आ रहे अमित शाह को भी अच्छी तरह से पता है कि धनुष नीतीश कुमार के पास है, ऐसे में आगामी चुनाव में नीतीश कुमार की अहमियत को दरकिनार नहीं किया जा सकता। 

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