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कैसे धीमी होगी आबादी की रफ्तार ?

आज विश्व जनसंख्या दिवस है। इस मौके पर पूरे विश्व में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे लोगों में ये
जागरूकता बढ़े कि बढ़ती आबादी के क्या-क्या नुकसान हैं और इसकी रफ्तार को कैसे धीमा किया जा सकता है। 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जिनमें जनसंख्या से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं भारत में विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। बढ़ती जनसंख्या की रफ्तार धीमी करने को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम में खुद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने जागरूकता कॉम्पीटिशन में अव्वल आए छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस मौके पर जे पी नड्डा ने परिवार नियोजन को बेहद महत्वपूर्ण बताया। एक समय था जब भारत में हेल्थ विभाग हम दो हमारे दो का नारा दिया था, लेकिन जिस रफ्तार से भारत की जनसंख्या बढ़ी है उसको देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नारा दिया है हम दो हमारे एक। वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस बार विश्व जनसंख्या का थीम रखा है फैमिली प्लानिंग इज अ ह्यूमन राइट यानि परिवार नियोजन मानव का अधिकार है। जाहिर है तेज रफ्तार से बढ़ रही जनसंख्या को लेकर देश-विदेश की सभी संबंधित संस्थाएं और सरकार चिंतित है। चलिए आपको बताते हैं कि जिस रफ्तार से भारत की जनसंख्या बढ़ रही है उसके हिसाब से 2050 में भारत जनसंख्या के मामले में सबसे आगे निकल जाएगा। उस वक्त भारत की जनसंख्या 1.66 अरब होगी। वहीं चीन दूसरे नंबर पर चला जाएगा। 2050 में चीन की जनसंख्या 1.36 अरब हो जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त भारत की जनसंख्या 1.35 अरब के आसपास है। यानि अभी भारत जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर दूसरे नंबर पर है। वहीं चीन लगभग 1.42 अरब की जनसंख्या के साथ पहले नंबर पर है वहीं तीसरे नंबर पर अमेरिका की बारी आती है जिसकी जनसंख्या करीब 32.5 करोड़ है। आंकड़ों पर यकीन करें तो इस वक्त विश्व की जनसंख्या 760 करोड़ है। जाहिर ये आंकड़े काफी डरावने हैं। जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन न तो जमीन एक इंच बढ़ रही है और न ही इंसान के लिए बुनियादी सुविधाओं में इजाफा हो रहा है। धरती पर जो भी संसाधन है वो बढ़ती जनसंख्या के चलते घटते जा रहे हैं। ऐसे में जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है जनसंख्या की स्थिति विकराल होती जा रही है।

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