पीएम मोदी का शिक्षा प्रणाली में नवाचार पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान भवन में पुनरुत्थान के लिए शिक्षा पर अकादमिक नेतृत्व पर
सम्मेलन का उद्घाटन किया जिसमें 350 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, निदेशकों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन यूजीसी, AICTE, ICSSR, IGNCA, इग्नू, जेएनयू और एसजीटी विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया था। इस अवसर पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह भी उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई पुनरुत्थान या पुनर्जागरण की बात सोचता है तो पहली छवि जो उसके मस्तिष्क में आती है, वह स्वामी विवेकानंद की होती है जिन्होंने विश्व के समक्ष भारतीय सोच की ताकत को प्रदर्शित किया। शिक्षा के तत्वों के रूप में आत्म निर्भरता, चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों पर स्वामी विवेकानंद द्वारा बल दिए जाने का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम बिना शिक्षा के समाज,देश और अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज कोई देश या व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता। उन्होंने ‘वैश्विक नागरिक‘ या ‘वैश्विक ग्राम‘ के लिहाज से सोचने के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो चुनौतियां आज हमारे सामने हैं, उनका समाधान ढूंढने के लिए हमारे विश्वविद्यालयों या हमारे कॉलेजों का लाभ उठाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं ने ‘ब्रांड इंडिया‘को  एक वैश्विक पहचान दी है। उन्होंने स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और  स्किल इंडिया जैसी योजनाओं का उल्लेख किया जिनका उद्देश्य युवा प्रतिभा का विकास करना है। इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों के पुनरुत्थान के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटन भी अनुसंधान और संबंधित बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने में मददगार साबित होगा। 

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