पर्यटन के क्षेत्र में भारत का बढ़ता कदम

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री अल्फोंस कन्ननथना ने विश्व पर्यटन दिवस पर एक कार्यक्रम का
उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक पुस्तक का विमोचन भी किया। इसके साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उन्होंने कई लोगों को सम्मानित भी किया। इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन विभाग ने किया था। विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत 1990 में हुई थी। विश्व भर में कुछ देश ऐसे हैं जहां करोड़ों की संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। इसमें पहले नंबर पर फ्रांस है  उसके बाद अमेरिका है। उसके बाद स्पेन, चीन और  इटली का नंबर आता है। जहां भारी संख्या में पर्यटक घूमने-फिरने आते हैं। विश्व पर्यटन दिवस को मनाने के पीछे कारण यही है कि लोगों में पर्यटन को लेकर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता आए और वो पर्यटन में रोजगार के अवसर का विकास हो। भारत में भी पर्यटन को उद्योग के तौर पर विकसित करने की कोशिश की जा रही है। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में पर्यटन दिवस के अवसर पर घूमना-फिरना फ्री कर दिया गया है। वहीं ओडिशा में इस अवसर पर प्लास्टिक पर बैन लगा दिया गया है। वहीं एक किला ऐसा भी है जिसे कोई भी बादशाह जीत नहीं सका। महाराष्ट्र के औरंगाबाद से 16 किलोमीटर दूर दौलताबाद का किला है जो इस समय मशहूर टूरिस्ट स्पॉट हैं। इसे पहले देवगिरी कहा जाता था। यहां भारी संख्या में सैलानी आते हैं। इसी तरह राजस्थान के कई किले और महल देखने लायक हैं। आगरा का ताजमहल विश्व में विख्यात है। मथुरा, वाराणसी, गोरखपुर जैसे यूपी के कुछ शहर हैं जहां पर्यटक आते रहते हैं। बिहार में बोधगया और राजगीर पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इसी तरह देश के कई राज्य हैं जहां पर्यटकों का साल भर तांता लगा रहता  है।

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