उपराष्ट्रपति का आचार संहिता पर जोर

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सभी राजनीतिक दलों से
नीति कामकाज हो सके। उन्होंने राजनीतिक दलों से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर राजनीतिक विचारधाराओं से आगे बढ़ कर एक साथ आने की भी अपील की। प्रधानमंत्री एम वेंकैया नायडू ने देश में विधायकों की कार्यप्रणाली के बारे में चिंता जताई। एम. वेंकैया नायडू ने अपनी पुस्तक को वर्ष भर के दौरान उनके मिशन और इसके परिणामों को लेकर लोगों के प्रति इसे एक रिपोर्ट बताया, क्योंकि वह पिछले वर्ष 11 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए थे। मोदी ने कहा कि वो आश्चर्य करते हैं कि एम. नायडू राज्यसभा का संचालन करने के दौरान खुद पर नियंत्रण रखते हैं। इस दौरान मोदी ने नायडू के अनुशासन की भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने एम.वेंकैया नायडू से काफी कुछ सीखा है। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने कहा कि नायडू सदन के सभी वर्गों के हितों की सुरक्षा करते हुए राज्यसभा का संचालन बेहतर तरीके से कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा कि नायडू के पास विशाल राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव है और उनके कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने पर यह प्रदर्शित हुआ है। निर्माताओं के लिए सदन के भीतर और सदन के बाहर एक आचार संहिता का निर्माण करने को कहा है, जिससे कि संसदीय संस्थानों के प्रति लोगों के विश्वास को बहाल किया जा सके और व्यवस्थापिका का सुचारु

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