पितृ पक्ष में पिंडदान का महत्व

24 सितंबर से 8 अक्टूबर तक पितृ पक्ष चल रहा  है। हिन्दू धर्म में इस पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। लोग अपने
पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष की क्रिया करते हैं। बिहार में गया पितृ पक्ष श्राद्ध क्रिया के लिए जाना जाता है। यहां लोग फल्गू नदी के किनारे श्राद्ध क्रिया करते हैं यानि पिंडदान करते हैं। इस अवसर पर
यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। इसी तरह ओडिशा का पुरी भी श्राद्ध पक्ष के लिए मशहूर है। यहां जगन्नाथ पुरी चार धामों में से एक है यहां भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यह धार्मिक और पवित्र स्थान है जहां पितृ पक्ष और श्राद्ध पक्ष की क्रिया करने को काफी शुभ माना जाता है। इसी तरह उत्तराखंड का ऋषिकेश 
भी काफी मशहूर है। यहां भी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ करते  हैं। ऋषिकेश का अपना धार्मिक महत्व है। हिमालय की तलहटी में बसे ऋषिकेश से होकर गंगा नदी निकलती है। श्राद्ध पक्ष के दौरान यहां काफी लोग पिंडदान करते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश का हरिद्वार भी अपना धार्मिक महत्व रखता 
है। यह हिंदू धर्म के मुताबिक सात सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। हरिद्वार से निकलकर गंगा नदी मैदानी इलाकों में पहुंचती है। इसे हरिद्वार यानि हरी का द्वार कहा जाता है। यह एक पवित्र स्थान है। यहां भी पितृ पक्ष को लोग अपने पूर्वजों के नाम पर पिंडदान करते हैं।  इसी तरह गुजरात में स्थित भगवान कृष्ण की नगरी
द्वारका में भी पिंडदान किया जाता है। इलाहबाद जो कि कुंभ और अर्ध कुंभ के लिए प्रसिद्ध है। यहां गंगा और यमुना नदी आकर मिलती हैं। शुभ तिथियों पर गंगा नदी में स्नान करने के लिए यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। लोग पितृ पक्ष में यहां अपने पूर्वजों के लिए जल अर्पण करते हैं। वहीं कोलकाता में स्थित कालीघाट माता काली के मंदिर में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा पाठ करवाते हैं। 

Comments