नक्सलियों का हमला, मीडियाकर्मी सहित 3 की मौत

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव है। बस्तर को नक्सल प्रभावित मानते हुए चुनाव आयोग ने बस्तर और
राजनांदगांव में चुनाव पहले चरण यानि 12 नवंबर को मतदान होना है। मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक और प्रत्याशी से लेकर कार्यकर्ता तक, सभी  चुनाव प्रचार में जुट  गए हैंं। बस्तर नके कई गांव ऐसे हैं जहां के रहने वाले लोग पहली बार मतदान करने वाले हैं। जैसे-जैसे बस्तर के अंदरुनी इलाकों में विकास की रोशनी पहुंचती गई वैसे-वैसे उन इलाकों में नक्सली पकड़ ढीली पड़ती चली गई। अब जब चुनाव सामने हैं तो नक्सली ग्रामीणों में दहशत पैदा करने के लिए हत्या, विस्फोट जैसे संगीन जुर्म कर रहे हैं। बस्तर के कई इलाकों में नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार करने का फरमान जारी किया है। ये फरमान पोस्टर बैनर के साथ गाड़ियों पर लिखी मिल रही हैं। जिसके चलते ग्रामीण दशहत में आ रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में कितना प्रतिशत मतदान होगा। इसके बारे में अभी से कुछ कहना ठीक नहीं होगा, फिलहाल चुनाव आयोग के सामने बड़ी समस्या ये है कि वो कैसे नक्सल प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों को बेखौफ होकर मतदान के लिए रराजी करता है। 30 अक्टूबर को नक्सलियों ने अरनपुर थाना क्षेत्र के नीलावाया के जंगल में IED ब्लास्ट कर दिया, जिसमें एक SI रुद्र प्रताप सिंह और कॉन्स्टेबल मंगलराम शहीद हो गए, वहीं दूरदर्शन का कैमरापर्सन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई। दूरदर्शन के वीडियो पत्रकार की मौत पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने गहरा दुख व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कैमरापर्सन के जज्बे को सलाम किया। राज्यवर्धन सिंह ने कहा कि सरकार कैमरापर्सन के गमजदा परिवार के साथ है। इस हमले में दो जवान भी घायल हुए हैं। इसके पहले नक्सलियों ने 28 अक्टूबर को भाजपा नेता नंदल मुदियामी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। जिनका इलाज जारी है। नंदल मुदियामी दंतेवाड़ा जिला परिषद के सदस्य हैं। उन पर जानलेवा हमला होने के बाद भाजपा के केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपनी जगदलपुर दौरा रद्द कर दिया। इसके पहले नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर 27 अक्टूबर को बम ब्लास्ट कर दिया जिसमें CRPF के चार जवान शहीद हो गए वहीं 2 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। बहरहाल ये कहना ठीक रहेगा कि सरकार के सामने नक्सली मंसूबा क्या है, वो तो सामने हैं। अब ये सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वो नक्सल प्रभावित इलाकोें में रहने वाले ग्रामीणों को नक्सलियों की दहशत से बाहर निकालें और लोकतंत्र के इस महापर्व में सहभागी बनाएं।

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