लोकतंत्र में असहमति मंजूर, विघटन नामंजूर: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की रजत जयंती के अवसर पर
मानव अधिकार सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र हर व्यक्ति को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति देता है। उपराष्ट्रपति ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति का स्वागत किया जा सकता है, लेकिन विघटन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी राज्य या देश के खिलाफ बोलने की खुली छूट नहीं दी जा सकती। उपराष्ट्रपति ने कहा कि मानव अधिकारों का समर्थन तभी तक किया जा सकता है जब तक कि देश के नागरिकों के साथ शांति और कानून व्यवस्था बहाल उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा और सम्मान की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू समेत कई लोग मौजूद थे।  उपराष्ट्रपति ने NBA द्वारा आयोजित तीसरे जस्टिस जे एस वर्मा मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम में मीडिया की स्वतंत्रता और जिम्मेदारियों पर व्याख्यान दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ सूचना को समाज के अंतिम पायदान तक खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए।

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