#MeToo का असर, खुल रही पोल !

#MeToo अभियान पोल खोल बन गया है। कई लोग हैं जिनके चेहरे से शराफत का मुखौटा उतर गया है। केंद्रीय
मंत्री एम जे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगने के बाद केंद्र सरकार हरकत में आई है। फिलहाल एम जे अकबर से इस्तीफा ले लिया गया है। वहीं सरकार ने #MeToo के जरिए सामने आए आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। इस टीम की अध्यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को इसका सदस्य बनाया गया है। ये समिति तीन महीने के अंदर में अपनी रिपोर्ट देगी। जिसके बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। हालांकि #MeToo के दायरे में जो लोग आए हैं उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। लेकिन  #MeToo अभियान को महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिख कर महिला सुरक्षा की बात उठाई है। उधर बॉलीवुड में यौन शोषण को लेकर प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया काफी सख्त हुआ है। उसने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक समिति भी बनाई है। मगर सवाल ये उठता है कि जब महिलाएं खुलकर अपने ऊपर हुए अत्याचारों को बता रही हैं तभी प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया को महिला अभिनेत्रियों की सुरक्षा का ध्यान क्यों आया। यदि तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर आरोप नहीं लगाया हुआ होता तो न तो अकबर इस्तीफा देते और न ही प्रोड्यूसर्स की संस्था समिति गठित करती। बॉलीवुड में कुछ नाम हैं जो अपनी करतूतों के चलते बदनाम हैं। पत्रकारिता के महान अकबर तो कोर्ट चले गए। वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ  अपने ऊपर लगे आरोप को सफाई दे-देकर धोने की कोशिश में जुटे हैं। न जाने ऐसे कितने पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी मर्यादा लांघी है। वहीं मर्यादा लांघने में बॉलीवुड पहले से ही बदनाम है। बॉलीवुड में भी कई नाम हैं जिन्होंने धमकी दी है कि उनकी छवि को खराब करने के लिए वो कोर्ट जाएंगे। यानि #MeToo कैंपेन को कानून का डर दिखाया जा रहा है। मगर यहां सवाल ये है कि #MeToo किसी एक व्यक्ति विशेष को टारगेट करके नहीं चलाया जा रहा है, ऐसे में कोर्ट को भी #MeToo के सभी पहलुओं पर गौर करना होगा, वरना सालों से दबी बात दबकर ही रह जाएगी। कहने वाला कहता रहेगा तू अबला है और अबला ही रहेगी। ऐसे में कोर्ट और सरकार के ऊपर महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी जिम्मेदारी है। बॉलीवुड कास्टिंग काउच के लिए पहले से बदनाम है। कुछ ऐसा ही हाल पत्रकारिता का भी है। वैसे देखा जाए तो हर सेक्टर में ऐसे खलनायक मिल जाएंगे जो महिलाओं को सिर्फ एक खिलौना समझते हैं। फिल्म डायरेक्टर सुभाष घई की फिल्म खलनायक का ये डायलॉग याद आता है
नायक नहीं खलनायक हूं मैं, जुल्मी बड़ा दुखदायक हूं मैं
ये बॉलीवुड के उन नायकों के लिए काफी फिट बैठता है जो हीरोइन के शरीर से खेलकर उसकी जिंदगी दुखदायक बना देते हैं। ये बॉलीवुड के कुछ नाम हैं जिन पर आरोप ऐसा लगा है जिस पर हर कोई हैरान है। जितेंद्र, जैकी श्रॉप, आदित्य पंचोली, दिबाकर बनर्जी, राजेश खन्ना, शाइनी आहूजा, अंकित तिवारी, मधुर भंडारकर, ओम पुरी, इरफान खान, नाना पाटेकर, आलोक नाथ, रजत कपूर, वरूण ग्रोवर, चेतन भगत,विकास बहल, सुभाष घई, अनूप जलोटा, अन्नू मलिक, अभिजीत, साजिद खान, विवेक अग्निहोत्री , महमूद फारुकी समेत कई नाम है। आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, लेकिन खलनायकों की फेहरिस्त खत्म नहीं होगी। लेकिन धन्यवाद उस हॉलीवुड अभिनेत्री का, जिसने अपने ऊपर हुए यौन शोषण का खुलासा #MeToo  के जरिए करके महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत पहल की है। हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने 2017 के अक्टूबर महीने में #MeToo के जरिए अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा किया था। फिल्म निर्माता हार्वी वाइंस्टाइन, अभिनेता केविन स्पेसी समेत कई हॉलीवुड हस्तियों पर यौन शोषण के आरोप लगे। हॉलीवुड से होता हुआ #MeToo भारत आया है। उम्मीद की जा रही है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये पहल भी मील का पत्थर साबित होगी। 

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