तीन राज्यों में हारने के बाद टेंशन में मोदी !

 दिल्ली: सत्ता का सेमीफाइनल हार गए मोदी जी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मोदी के विकास
की हवा निकल गई। अब तो विपक्ष की भीड़ में सत्ता भी नहीं दिख रही। कितने अरमान से जनता ने नरेंद्र मोदी को दिल्ली की कुर्सी सौंपी, लेकिन मोदी जी ने सब मिट्टी में मिला दिया। मोदी जी को जनता ने 5 साल का समय दिया और मोदी जी भी साल 2014 में घोषणा की थी कि वो लोकसभा चुनाव 2019 में जब वोट मांगने आएंगे तो अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आएंगे और जनता को बताएंगे कि उन्होंने इन पांच सालों में विकास के कितने काम किए। मोदी जी खुद को जनता का प्रधान सेवक कहते आए हैं। अब उन्होंने जनता की कितनी सेवा की ये तो वही जानें, लेकिन जिस तरह से 56 इंच का सीना तानकर वो खुद को देश का चौकीदार कहते हैं तो विपक्ष में बैठे राहुल गांधी उन्हें सरेआम चोर बना  देते हैं। क्या इसके लिए कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी पर मानहानि का मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। मोदी जी इस पर क्यों चुप हैं। राफेल मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने मोदी जी की किरकिरी करने की कोशिश लगातार कर रही है, लेकिन मोदी जी इस पर भी कुछ नहीं बोल रहे । ये सब जानते हैं कि मोदी जी मौनी बाबा नहीं है। वो बहुत अच्छा बोलते हैं, धाराप्रवाह बोलते हैं। मगर जब उन पर कोई आरोप लगाता है तो वो मनमोहन सिंह बन जाते हैं। याद है आपको मनमोहन सिंह जब प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने कहा था कि हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी। तब मोदी की भारतीय जनता पार्टी के लोग तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी को लेकर मजाक उड़ाया करते थे। आज उसी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री को क्या हो गया है जो एक सवाल का एक ही जवाब नहीं दे पा रहे हैं। हाल ही में अपनी किताब चेंजिंग इंडिया के विमोचन के अवसर पर मनमोहन सिंह ने कहा कि वो ऐसे प्रधानमंत्री नहीं थे जो मीडिया से डरता हो। वो मीडिया के हर सवाल का जवाब देते थे। यहां तक कि जब भी वो विदेश यात्रा पर जाते थे तो पत्रकारों की टीम को लेकर जाते थे। मगर मोदीजी ने तो मीडिया से एक तरह की दूरी बनाकर रखी हुई है। जब उन्हें लगता है कि उऩकी बात मीडिया के बिना नहीं बनेगी तो वो आते हैं अपनी बात कहते हैं और चलते बनते हैं। यानि मीडिया के सवालों को झेलने की शक्ति उनमें नहीं है। नोटबंदी, GST, आरक्षण, आतंकवाद, नक्सलवाद समेत कई मुद्दे हैं जिसने भारत के नागरिकों के पसीने छुड़ा दिए। अब पसीना मोदी जी का छूट रहा है। लिहाजा उन्होंने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से कमर कस ली है। मोदी 20 दिसंबर से लेकर 3 जनवरी तक बीजेपी के सभी सांसदों से अलग-अलग समूह में मुलाकात करेंगे और जमीनी हकीकत जानने की कोशिश करेंगे कि अगली बार उनकी सरकार या फिर उनकी हार। वो सांसद क्या बताएंगे जो मोदी लहर पर सवार होकर लोकसभा में पहुंचे हैं। खैर मोदी का अपना तरीका है लोगों की  नब्ज टटोलने की। 20 दिसंबर को मोदी हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के सांसदों से मुलाकात करेंगे। वो शाम 8 से 10 बजे दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड के सांसदों से मिलेंगे। इसके बाद 26 दिसंबर की शाम 6 से 8 बजे तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, 8 से 10 बजे तक मध्य उत्तर प्रदेश के सांसदों से मुलाकात करेंगे। 27 दिसंबर को मोदी शाम 6 से 8 बजे तक पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के सांसदों से मुलाकात करेंगे। इसी तरह 28 दिसंबर को शाम 6 से 8 तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, रात 8 से 10 बजे तक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और लक्षद्वीप के सांसदों से मोदी मिलेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि वर्तमान हालात में किस तरह की रणनीति बनाई जाए ताकि एक बार फिर बीजेपी की सरकार बन जाए। मोदी अपनी सरकार बनाने के लिए गुजरात के सांसदों से 2 जनवरी को मुलाकात लेंगे और गुजरात की जमीनी हकीकत जानकर आगामी लोकसभा की रणऩीति पर मंथन करेंगे। 2 जनवरी को शाम 6 से 8 बजे तक महाराष्ट्र, रात 8 से 10 बजे तक गुजरात, दादर नागर हवेली और दमन दीव से सांसदों से पीएम मोदी मिलेंगे। मिलने का सिलसिला 3 जनवरी को भी चलेगा। इस दिन मोदी शाम 6 से 8 बजे तक राजस्थान के सांसदों से मिलेंगे। इसी दिन रात 8 से 10 बजे तक अंडमान निकोबार, झारखंड, उड़ीसा, नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल के सांसदों से पीएम मोदी मिलेंगे। राम से लेकर हनुमान तक, देश से लेकर विदेश तक, स्वच्छता अभियान से लेकर महिला सशक्तिकरण तक कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मोदी अपने पक्ष में माहौल बना रहे हैं। अब मोदी को कौन समझाए कि जिस तरह से बासी हो चुका भोजन करना कोई पसंद नहीं करता वैसे ही पुराने पड़ चुके मुद्दों का जनता पर उतना असर नहीं हो पाएगा। अगला लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मोदी के पास नया क्या है जिसके दम पर एक बार फिर वो अपना सीना 56 इंच का करके बोले देखो दुनिया वालों मोदी का विकास मॉडल जो लोकसभा चुनाव के रास्ते से गुजरेगा। 

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