तो क्या राजीव गांधी 'भारत रत्न' नहीं हैं ?

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेना चाहती है। इसके
लिए दिल्ली विधानसभा में भारत रत्न वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अरविंद केजरीवाल मौन है लेकिन एक्शन लेने में आगे हैं। उन्होंने प्रस्ताव का विरोध करने वाली विधायक अलका लांबा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। जिसकी सजा उन्हें पार्टी से निष्कासन के रूप में मिली। चलिए आपको बताते हैं कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस के दिवंगत नेता राजीव गांधी से भारत रत्न वापस क्यों लेना चाहती है। दरअसल  विधानसभा में 1984 दंगे को लेकर चर्चा चल रही थी। उसी में जरनैल सिंह ने अपने भाषण में राजीव गांधी का नाम भी इस दंगे में जोड़ दिया और राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने का प्रस्ताव रखा। जिस पर सदन में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने खड़े होकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। अब अलका लांबा का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। जिसके बाद उन्हें आम आदमी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
                                                जरनैल सिंह कौन है?
जनरैल सिंह आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले पत्रकार था। ये वही बदतमीज पत्रकार है जिसने 7 अप्रैल 2009 को एक संवाददाता सम्मेलन में तत्कालीन गृह मंत्री पी.  चिदंबरम पर जूता फेंक दिया था। जिसके बाद केजरीवाल ने इसे अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। 22 दिसंबर को दिल्ली विधानसभा में 1984 सिख दंगे की चर्चा के दौरान जरनैल सिंह ने इस दंगे में दिवंगत राजीव गांधी का नाम भी जोड़ दिया और भारत रत्न वापस लेने की मांग की। जिस पर आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों ने सहमति जताई।

                                               अलका लांंबा ने किया विरोध
अलका लांबा करीब 20 सालों तक कांग्रेस में अलग-अलग पदों पर रहीं। 26 दिसंबर 2014 को वो आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। फरवरी 2015 में उन्हें चांदनी चौक से विधायक चुन लिया गया। 43 साल की लांबा ने राजीव गांधी के मुद्दे पर पार्टी की कड़ी आलोचना की है। वहीं कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी के इस कदम की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपना जीवन देश के लिए कुर्बान कर दिया , उससे भारत रत्न वापस लेने की मांग की जा रही है। यदि सिख राजीव गांधी या कांग्रेस से ना्राज होते तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बनती।            

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